Monday, August 19, 2024

हेजलनट्स: काजू-बादाम से भी ताकतवर, शरीर को दे नई जान

 

हेजलनट्स: काजू-बादाम से भी ताकतवर, शरीर को दे नई जान


हेजलनट्स, जिसे पहाड़ी बादाम भी कहा जाता है, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह सूखी पसलियों पर मांस चढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने, दिल को स्वस्थ रखने, पाचन सुधारने और त्वचा-बालों की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है।


हेजलनट्स: काजू-बादाम से भी ताकतवर, शरीर को दे नई जान



ड्राई फ्रूट्स में आमतौर पर काजू, बादाम और अखरोट जैसे मेवे सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं। लेकिन एक ऐसा ड्राई फ्रूट भी है, जो ताकत और पोषण के मामले में इन्हें भी पीछे छोड़ देता है। ये है हेजलनट्स। इस लेख में हम हेज़लनट्स के फायदों के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो न केवल सूखी पसलियों पर मांस चढ़ाने में मददगार है बल्कि हड्डियों में भी लोहा भरने का काम करता है।




हेजलनट्स: पोषण का भंडार


हेजलनट्स को 'पहाड़ी बादाम' के नाम से भी जाना जाता है। यह सूखा मेवा पोषण से भरपूर होता है, जिसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरमार होती है। इसके सेवन से न केवल शरीर में ताकत आती है, बल्कि यह हड्डियों को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।




सूखी पसलियों पर मांस चढ़ाने में मददगार


यदि आपका शरीर कमजोर है, पसलियां दिखाई देती हैं और लोग आपका मजाक बनाते हैं, तो हेजलनट्स का सेवन करें। इसमें मौजूद प्रोटीन शरीर के विकास में अहम भूमिका निभाता है। चाहे आपका लक्ष्य 1 किलो वजन बढ़ाना हो या 10 किलो, प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा आपके लिए आवश्यक होती है। हेजलनट्स इस कमी को पूरा करने में मदद करता है और शरीर को मजबूती प्रदान करता है।




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हड्डियों को बनाए मजबूत


हेजलनट्स के अंदर कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है, जो हड्डियों को मजबूती देता है। यह हड्डियों को लोहा जैसा कड़ा बनाने का काम करता है। इससे हड्डियों के कमजोर होने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, यह अन्य बॉडी फंक्शन्स में भी सहायक है।




हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद


हेजलनट्स में मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो दिल की सेहत के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। इससे आपका दिल स्वस्थ और मजबूत बना रहता है।




एंटी-एजिंग के गुण


हेजलनट्स में विटामिन E प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और सेल्स की सुरक्षा करता है। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और आपकी त्वचा जवान और स्वस्थ बनी रहती है।




दिमाग की गति को बढ़ाता है


हेजलनट्स में विटामिन B6, विटामिन E और फोलेट मौजूद होते हैं, जो मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर बनाते हैं। यह मेमोरी को सुधारने के साथ-साथ अल्जाइमर जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है। इसके नियमित सेवन से आपका दिमाग तेज और सक्रिय रहता है।



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पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है


हेजलनट्स में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। यह कब्ज की समस्या को दूर करता है और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है। इससे आपका पेट स्वस्थ रहता है और आप हल्का महसूस करते हैं।




वजन नियंत्रित करने में सहायक


हेजलनट्स में उच्च मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं। इससे भूख कम लगती है और अनावश्यक खाने की आदतों पर नियंत्रण रहता है। यह वजन को नियंत्रित करने और मोटापे से बचाने में मददगार साबित होता है।




त्वचा और बालों के लिए लाभकारी


हेजलनट्स का तेल त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद विटामिन E त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है। इसका उपयोग बालों की मजबूती और चमक के लिए भी किया जा सकता है। हेजलनट्स का नियमित सेवन आपके चेहरे और बालों की खूबसूरती में चार चांद लगा सकता है।



निष्कर्ष


हेजलनट्स सिर्फ एक ड्राई फ्रूट नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण स्वास्थ्य वर्धक टॉनिक है। इसके नियमित सेवन से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करता है। चाहे आपका उद्देश्य वजन बढ़ाना हो, हड्डियों को मजबूत करना हो या दिल और दिमाग को स्वस्थ रखना हो, हेजलनट्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
इसलिए, अगर आप भी अपनी सेहत को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आज ही से हेजलनट्स को अपने आहार में शामिल करें।





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हेजलनट्स से जुड़े 5 सामान्य प्रश्न (FAQs)


1. हेजलनट्स खाने से शरीर को क्या लाभ मिलता है?

हेजलनट्स प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन E से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों को बढ़ाने और दिल-दिमाग को स्वस्थ रखने में सहायक है।


2. क्या हेजलनट्स वजन बढ़ाने में मदद करता है?

हाँ, हेजलनट्स में मौजूद प्रोटीन और स्वस्थ वसा वजन बढ़ाने और शरीर को ताकत देने में मदद करते हैं।


3. हेजलनट्स किस तरह से हड्डियों को मजबूत बनाता है?

हेजलनट्स में मौजूद कैल्शियम और अन्य मिनरल्स हड्डियों को लोहा जैसा मजबूत बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव करते हैं।


4. क्या हेजलनट्स दिल के लिए सुरक्षित है?

जी हाँ, हेजलनट्स में मोनोसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर दिल की सेहत को बेहतर बनाते हैं।


5. क्या हेजलनट्स का तेल त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद है?

हेजलनट्स का तेल त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है, जबकि बालों को मजबूत और घना बनाने में भी सहायक होता है।



डिस्क्लेमर:

यह जानकारी [Navbharat Times] से ली गई है। इस पोस्ट का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करना है। कृपया किसी भी स्वास्थ्य सलाह या उपचार से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

Thursday, August 15, 2024

चौंकाने वाली रिपोर्ट: आपके नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स के कण! जानें क्या है सच्चाई?

चौंकाने वाली रिपोर्ट: आपके नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स के कण! जानें क्या है सच्चाई?

हाल ही में एक रिपोर्ट में भारतीय नमक और चीनी ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी का खुलासा हुआ है। चाहे पैकेज्ड हो या खुला, हर प्रकार के नमक और चीनी में 89.15 कण प्रति किलोग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं। ये छोटे प्लास्टिक कण हमारे भोजन, पानी और हवा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कैंसर, प्रजनन में दिक्कतें और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस चिंता को देखते हुए उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है, जबकि सरकार और एजेंसियों को इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने चाहिए


चौंकाने वाली रिपोर्ट: आपके नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स के कण!




क्या आपके नमक और चीनी में भी हैं माइक्रोप्लास्टिक्स? जानें इस नई रिपोर्ट के बारे में


आज के दौर में जब खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है, एक नई रिपोर्ट ने भारतीय नमक और चीनी ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति पर ध्यान आकर्षित किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, चाहे वह पैकेज्ड हो या खुली मार्केट से खरीदा गया, हर तरह के नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स के कण पाए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे भोजन का हिस्सा बन चुके हैं, जिसका हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है।




Table of Contents

माइक्रोप्लास्टिक्स क्या होते हैं?


माइक्रोप्लास्टिक्स 5 मिलीमीटर से भी छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं, जो या तो उत्पादों में सीधे मिलाए जाते हैं या प्लास्टिक के टूटने के कारण उत्पन्न होते हैं। ये कण हवा, पानी, और भोजन के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।




नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी


हालिया अध्ययन के मुताबिक, भारतीय बाजार में बिकने वाले लगभग सभी नमक और चीनी ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा 89.15 कण प्रति किलोग्राम तक पाई गई है। वहीं, चीनी के सैंपल्स में 11.85 से 68.25 कण प्रति किलोग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति दर्ज की गई है।




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माइक्रोप्लास्टिक्स के स्वास्थ्य पर प्रभाव


माइक्रोप्लास्टिक्स के लगातार सेवन से दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ये कण शरीर में प्रवेश कर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, ये प्रजनन और विकास संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न कर सकते हैं।



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समाधान और जागरूकता


इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति एक गंभीर चिंता का विषय है। उपभोक्ताओं को अपने रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, सरकार और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों को इस मुद्दे को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि हमारे भोजन में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके।



Microplastics in Salt and Sugar Brands: FAQs



1. माइक्रोप्लास्टिक्स क्या होते हैं?


माइक्रोप्लास्टिक्स 5 मिलीमीटर से भी छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं, जो या तो उत्पादों में सीधे मिलाए जाते हैं या प्लास्टिक के टूटने के कारण उत्पन्न होते हैं। ये हमारे भोजन, पानी और हवा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।



2. क्या सभी नमक और चीनी ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक्स होते हैं?


हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में बिकने वाले लगभग सभी नमक और चीनी ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी पाई गई है। चाहे वो पैकेज्ड हो या खुली मार्केट से खरीदा गया हो, सभी में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं।



3. नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा कितनी होती है?


रिपोर्ट के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक में 89.15 कण प्रति किलोग्राम तक और चीनी में 11.85 से 68.25 कण प्रति किलोग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं।



4. माइक्रोप्लास्टिक्स का हमारे स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?


माइक्रोप्लास्टिक्स का दीर्घकालिक सेवन शरीर में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। यह कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा, ये प्रजनन और विकास में भी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।



5. माइक्रोप्लास्टिक्स से बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?


उपभोक्ताओं को अपने रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों के चयन में सतर्कता बरतनी चाहिए। साथ ही, सरकार और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों को माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा को कम करने के लिए सख्त नियम और उपाय लागू करने की आवश्यकता है।



6. क्या माइक्रोप्लास्टिक्स को पूरी तरह से हटाना संभव है?


वर्तमान में, खाद्य पदार्थों से माइक्रोप्लास्टिक्स को पूरी तरह से हटाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जागरूकता और बेहतर प्रबंधन से इसे कम किया जा सकता है।



7. क्या माइक्रोप्लास्टिक्स केवल नमक और चीनी में होते हैं?


नहीं, माइक्रोप्लास्टिक्स अन्य खाद्य पदार्थों, पानी, और यहां तक कि हवा में भी मौजूद हो सकते हैं।



8. क्या जैविक (ऑर्गेनिक) नमक और चीनी में भी माइक्रोप्लास्टिक्स हो सकते हैं?


जैविक खाद्य पदार्थों में भी माइक्रोप्लास्टिक्स हो सकते हैं, क्योंकि ये प्रदूषण के कारण पर्यावरण में व्यापक रूप से फैले हुए हैं।


Monday, August 12, 2024

डायबिटीज में दूध दही का सेवन:सेहत के लिए लाभ दायक या हानिकारक ! सही मात्रा और सही समय

डायबिटीज में दूध दही का सेवन:सेहत के लिए लाभ दायक या हानिकारक ! सही मात्रा और सही समय 


डायबिटीज में दूध दही का सेवन:सेहत के लिए लाभ दायक या हानिकारक



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क्या डायबिटीज के मरीजों को डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए


कुछ लोग और सो-कॉल्ड डाइट एक्सपर्ट्स कई बार कहते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को डेयरी प्रोडक्ट्स को अवॉयड करना चाहिए। इन्हें खाने से डायबिटीज के मरीजों की शुगर बढ़ती है और जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है, उनके अंदर भी इसके होने का जो रिस्क है, वो कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा बहुत सारे लोगों का मानना है। तो आज की इस पोस्ट में हम जानने की कोशिश करेंगे कि सच्चाई क्या है? क्या वाकई में ऐसा है या फिर ये सिर्फ एक अफवाह है? तो चलिए बिना किसी देरी के इसको समझने की कोशिश करते हैं और जानते हैं कि साइंस इस बारे में क्या कहती है? क्या आपको डायबिटीज में दूध और दही का सेवन नहीं करना चाहिए, या अगर करना चाहिए तो ऐसे में कौन-कौन सी सावधानि

याँ रखनी पड़ेंगी?




दूध और दही में मौजूद लैक्टोज और उसका प्रभाव



सबसे पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि दूध और दही को कुछ लोग डायबिटीज के लिए इतना बुरा क्यों मानते हैं। तो देखिए दोस्तों, ऐसा इसलिए हो सकता है कि दूध और दही में लैक्टोज होता है, जोकि एक तरह की नैचुरल शुगर है। जब हम दूध या दही का सेवन करते हैं, तो लैक्टोज हमारे शरीर में जाता है। इसके लिए कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि अगर आपको डायबिटीज है, तो दूध और दही से आपको दूर रहना चाहिए, इन्हें अवॉयड करना चाहिए।



इसके अलावा, लैक्टोज इंटॉलरेंस भी एक बहुत ही कॉमन कंसर्न है। बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं, आपने अक्सर देखा होगा, जिन्हें दूध हजम नहीं होता है, जोकि लैक्टोज इंटॉलरेंस की वजह से होता है। इसमें आपके अंदर ब्लोटिंग, गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, होल मिल्क के अंदर हाई सैचुरेटेड फैट होता है दोस्तों, जोकि इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ा सकता है, जिससे शुगर की समस्या बढ़ सकती है।




डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कैसे करें?



अब सवाल यह आता है कि क्या डायबिटीज के मरीजों को डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए, और अगर करना चाहिए तो इसके लिए क्या तरीका है, वो भी चलिए जानते हैं। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और इन सभी बातों के बारे में पूरी डिटेल से जानते हैं। लेकिन उससे पहले, अगर यह वीडियो आपको पसंद आ रही हो, तो फटाफट से लाइक वाला बटन ज़रूर प्रेस कर दीजिए। कंजूसी मत कीजिए, और अगर मन में कोई शंका हो, तो नीचे कॉमेंट सेक्शन में मुझे ज़रूर पूछिएगा। मैं सभी कॉमेंट्स को पढ़ता हूँ।



तो दोस्तों, अगर आपको डायबिटीज है और आप डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहते हैं, तो आप बेशक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इन्हें बहुत ज़्यादा मात्रा में कंज्यूम नहीं करना है, क्योंकि ऐसा करने से यह ब्लड शुगर पर सिग्निफिकेंट इंपैक्ट डाल सकता है। इसलिए दूध और दही को हमेशा मॉडरेट मात्रा में ही इस्तेमाल करना है।




कितना सेवन करें?



कितना लेना चाहिए, इसकी बात मैं आपको आगे बताऊंगा। वैसे अगर आपको डायबिटीज है, तो कोशिश करें कि हमेशा लो फैट या स्किम्ड मिल्क को ही पिएं। इसमें सैचुरेटेड फैट कम होता है, जिससे कि दिल की बीमारियां और हाई कोलेस्ट्रॉल, जोकि डायबिटीज के मरीजों में बहुत ही कॉमनली पाया जाता है, यह ना हो पाए। इसी तरह से दही की बात करें, तो हमेशा प्लेन, अनस्वीटेंड और अनफ्लेवर्ड दही का ही इस्तेमाल करें। या फिर अगर आप थोड़े से पैसे ज़्यादा खर्च कर सकते हैं, तो ग्रीक योगर्ट का इस्तेमाल करें। यह बहुत ही बढ़िया चीज़ होती है।




सेवन की मात्रा और समय



एक दिन में आप कितना दूध पीते हैं या कितना दही खाते हैं, यह भी बहुत मायने रखता है। अगर आप मॉडरेट मात्रा में इन्हें इस्तेमाल करते हैं, तो इससे आपकी शुगर नहीं बढ़ती है। लेकिन हाँ, एक बात का ध्यान रखना बहुत इंपोर्टेंट है कि एक वक्त में आपको 200 से 250 ml दूध ही पीना है, इससे ज़्यादा नहीं पीना है। अगर आपको एक दिन में 500 ml दूध पीना है, तो जोकि आपकी रोजाना की कैल्शियम रिक्वायरमेंट है, वह काफी हद तक पूरी हो जाती है। तो 500 ml दूध अगर आप पीना चाहते हैं, तो इसके लिए आप इसे दिन में दो या तीन टाइम में डिवाइड कर लीजिए, मानी 200 ml आप दिन में तीन टाइम पी लीजिए या 250 ml करके दिन में दो टाइम पी लीजिए। इससे आपको न्यूट्रिशन भरपूर मिलेगा और आपकी शुगर भी नहीं बढ़ेगी।




आयुर्वेदिक दृष्टिकोण



आयुर्वेद के नजरिए से देखा जाए, तो आपको हमेशा गर्म दूध ही पीना चाहिए। यह बॉडी को नरीशमेंट देता है और वात और पित्त दोष को शांत करने का काम करता है। और अगर हो सके, तो आप दूध के अंदर हल्दी या फिर छोटी इलायची डाल लें। इससे दूध का जो लाभ है, वह भी बढ़ जाता है और यह डाइजेस्ट भी आसानी से हो जाता है। दही की बात करें, तो दही को भी आप रोजाना 150 से 200 ग्राम तक कंज्यूम कर सकते हैं और इसे भी आपको दिन में दो टाइम में डिवाइड करके ही खाना है, एक बार में बहुत सारा नहीं खाना है। दही बॉडी में कफ और पित्त दोष को बढ़ाता है, इसलिए ऐसे लोग जिनके अंदर ये दोष बढ़े हुए हैं, उन्हें दही नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, दही का सेवन हमेशा दिन के समय में ही करना चाहिए, जब आपकी डाइजेस्टिव फायर अपने पीक पर होती है। रात में दही का सेवन करने से बहुत सारी बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं और आपके अंदर हार्मोनल और जो हमारे वात, पित्त, कफ दोष होते हैं, उनके अंदर इंबैलेंस भी पैदा हो सकता है।




निष्कर्ष


तो दोस्तों, पूरी वीडियो का जो कन्क्लूजन है, वह यह है कि हम दूध को डायबिटीज के अंदर और दही को डायबिटीज के अंदर इस्तेमाल तो कर सकते हैं, लेकिन उसकी तीन शर्तें हैं। पहली शर्त है कि आपको बहुत ज़्यादा मात्रा में एक साथ दूध या दही का सेवन नहीं करना है। हमेशा थोड़ा-थोड़ा करके दिन में दो-तीन बार में डिवाइड करके ही इनका इस्तेमाल करना है। दूसरी, आपको कोशिश करनी है कि लो फैट और अनस्वीटेंड दूध और दही का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये आपके लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। अगर आप लो फैट और अनस्वीटेंड दूध का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो यह ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। तीसरी और सबसे इंपोर्टेंट बात, दूध और दही को हमेशा दिन में कई बार विभाजित करके ही सेवन करें, जिससे कि आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे।


सोर्स-: आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम जी का यूट्यूब चैनल 

सलीम जी को सुनने के लिए इस लिंक (https://youtu.be/eymQxV1v8gk?si=8pWmjFx-atQbKesA )पर क्लिक कर सकते हैं 

      Diclaimer:


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